मस्त विचार 2717
दबे होठों को बनाया है सहारा अपना,
सुना है कम बोलने से बहुत मसले सुलझ जाते हैं.
सुना है कम बोलने से बहुत मसले सुलझ जाते हैं.
_ वह असल में एक नई शुरुआत हो सकती है ..
ढह जाऊँ तो रेत सह जाऊँ तो पीर.
_गैरों को क्या पता रग कौनसी दबानी है..!!
_उन अपनों से जो अपने होने का आडम्बर रचते हैं, _दरअसल वे कभी हमारे नहीं होते..!!
गलत समझने से बेहतर होता है.
_ तो जो मिला हुआ है उसको भी खो दोगे.
_ परंतु जो प्राप्त था, उसे खो कर फिर पाना अत्यंत कठिन है !!