मस्त विचार 2385
इंसान ख्वाइशों से बंधा हुआ एक जिद्दी परिंदा है,
उम्मीदों से ही घायल है और उम्मीदों पर ही जिंदा है…!
घायल तो यहां हर परिंदा है,
_जो गिर कर फिर से उड़ चला वही जिंदा है.!!
उम्मीदों से ही घायल है और उम्मीदों पर ही जिंदा है…!
_जो गिर कर फिर से उड़ चला वही जिंदा है.!!
“ये ठीक नहीं”
कहीं देखा है शायद आपको, इतना कहकर बस हाथ जरूर मिला लेना!
थोडा हम थोड़ा तुम भी झूक जाते तो _ अच्छा था,
जिंदगी ना कटती यू विराने मे हमारी,,
हम तो नादा थे तूम समझदार हो जाते _ तो अच्छा था !!
तेरी हँसी की कीमत क्या है, ये बता दे तू.
अगली बार आओ तो वक़्त ले आना.