मस्त विचार 2373

ऐ ज़िन्दगी अपनी शर्तों में थोड़ी सी ढील दे दे,

हम बड़े हुए तो क्या, थोड़ा हमें भी बच्चों सा सुकून दे दे.

मस्त विचार 2371

हम खुद को बरगद बनाकर ज़माने भर को छांव बांटते रहे,

मेरे अपने ही हर दिन मुझको थोड़ा- थोड़ा काटते रहे…

ज़िन्दगी की तालीमों का सिलसिला, बदस्तूर चलता रहा…

कुछ पराये अपने हुए, कुछ अपनों का रंग बदलता रहा…

मस्त विचार 2370

समझदारी की बातें सिर्फ दो ही लोग करते हैं,

एक वो जिनकी उम्र अधिक है,

दूसरे वो जिसने कम उम्र में ही बहुत सी ठोकरें खायी हैं…

error: Content is protected