मस्त विचार 2564
कोई मरहम नहीं चाहिये, जख्म मिटाने के लिये.
तेरी एक झलक ही काफी है, मेरे ठीक हो जाने के लिये.
तेरी एक झलक ही काफी है, मेरे ठीक हो जाने के लिये.
देखा ये भी जाता है की पुकारा किसने है.
आज उसी घर में रहने से बैचेन है इंसान…
तुम भी उठाओ “हाथ” के मौसम “दुआ” का है.
मिली तो इस “शर्त” पे कि किसी से ना मिलो..!!
“ज़िन्दगी एक सफ़र है, आराम से चलते रहो
उतार-चढ़ाव तो आते रहेंगें, बस गियर बदलते रहो”