मस्त विचार 2355
जमाना खिलाफ हो क्या फर्क पड़ता है,
मैं तो जिंदगी आज भी अपने अंदाज में जीता हूँ.
मैं तो जिंदगी आज भी अपने अंदाज में जीता हूँ.
लौट कर फूलों मे खुशबू नही आने वाली.
क्यूंकि ख़ाली बर्तन ही ज़्यादा आवाज़ करते हैं.
ये मंजिल है काैन सी, न वाे समझ सके न हम.?
क्यूँकि उसमें ढूँढने के लिए कुछ नही होता.
तो मेरा जो कुछ भी है वो तुम्हारा होगा.