मस्त विचार 2529
करोगे क्या… ?
अगर कहूँ के उदास हूँ मैं….
अगर कहूँ के उदास हूँ मैं….
पर हम उस दर्द को समय के साथ साथ सहने के आदी हो जाते हैं.
जिसके पास वक़्त नहीं तेरे लिए, वो इतना ख़ास क्यों है।…….
क्योकि उन ख्वाहिशों के कारण जिन्दगी जीने की चाहत बनी रहती है.
आ जाये तो सब कुछ भुला देती है और न आये तो सब कुछ याद दिलाती है.
फिर नसीब क्या, मुकद्दर क्या, क्या लकीरें हाथ की.