मस्त विचार 2452
*गलतफहमी से बढ़कर दोस्ती का दुश्मन नहीं कोई..*
*परिंदों को उड़ाना हो तो बस शाख़ें हिला दीजिए…*
*परिंदों को उड़ाना हो तो बस शाख़ें हिला दीजिए…*
थोडा आहिस्ता चल… समझने तो दे,
ये पड़ाव है या है मंजिल मेरी.
_ एक ज़ख्म भरता नहीं कि, _ यह एक और ज़ख्म दे देती है..
मजबूरियों को मत कोसो, हर हाल में चलना सीखो.
मगर तब तक कई लोग, मेरे दिल से उतर जाएंगे…
और नाकामयाब लोग दुनिया के डर से अपने फैसले बदल लेते हैं.