मस्त विचार 2451
ऐ जिंदगी, बहुत तेज है रफ़्तार तेरी,
थोडा आहिस्ता चल… समझने तो दे,
ये पड़ाव है या है मंजिल मेरी.
थोडा आहिस्ता चल… समझने तो दे,
ये पड़ाव है या है मंजिल मेरी.
_ एक ज़ख्म भरता नहीं कि, _ यह एक और ज़ख्म दे देती है..
मजबूरियों को मत कोसो, हर हाल में चलना सीखो.
मगर तब तक कई लोग, मेरे दिल से उतर जाएंगे…
और नाकामयाब लोग दुनिया के डर से अपने फैसले बदल लेते हैं.
आज कल मनाने का रिवाज़ खत्म हो गया है.