मस्त विचार 2242
अहंकार की अति सुंदर व्याख्या :-
. बस इतनी सी बात. समंदर को खल गई~~
. एक काग़ज़ की नाव. मुझपे कैसे चल गई ~
. बस इतनी सी बात. समंदर को खल गई~~
. एक काग़ज़ की नाव. मुझपे कैसे चल गई ~
_ समझ लो कि हम, काँटों से घिर गए गुलाब हैं.
और जब पलटती है, तब पलटकर रख देती है.
इसलिये अच्छे दिनों मे अहंकार न करो …….
.लोग आपको दिल से याद करे तो समझ लेना आप पास हो गए.
कुछ कहा मैंने,
पर शायद तूने सुना नहीँ..
तू छीन सकती है बचपन मेरा,
पर बचपना नहीं..
“दुनिया” वालो की पसंद तो पलभर मे बदल जाती है।।”