मस्त विचार 2404
अक्सर वही लोग उठाते हैं हम पर ऊँगली,
जिनको हमें छूने की औकात नहीं होती.
जिनको हमें छूने की औकात नहीं होती.
हम तो निकल चुके हैं अब आँख से आंसू की तरह.
रोते हुए सो जाओ, मगर शिकवा ना करो..!!
और किसी को मनाना…
अब जिसको मिलना है मिले…बात करना है करें…वरना आगे बढ़ें…
मगर वो ये साबित कर ही देते हैं कि वो गैर हैं…
_ तूने चाहा है एक इंसान बनना, ये चाहत भी कोई कम नहीं है रे ..