मस्त विचार 2189

ये ज़िन्दगी का रंगमंच है दोस्तों….

यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है.

“माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती…

यहाँ आदमी आदमी से जलता है..

मस्त विचार 2188

अपने समय और अपने शब्दों के प्रयोग में कभी लापरवाही नहीं बरतें, _

_ क्योंकि ये न तो वापस आते हैं और न ही वापस मौका देते हैं ..

कभी कभी थोड़ा-सा लापरवाह होना जीवन भर का अफसोस बन जाता है,

_ यह सिर्फ़ भुगत कर ही महसूस किया जा सकता है.!!

मस्त विचार 2187

आँखो के पर्दे भी नम हो गए हैं , बातो के सिलसिले भी कम हो गए हैं.

पता नही गलती किसकी है, वक्त बुरा है या बुरे हम हो गए हैं .

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