मस्त विचार 2363
ज़िन्दगी से बस इतना सीखा….
कि जल जाओ कड़ी धुप में मगर,
अपनों से कभी साया- ए- दीवार न मांगों…
कि जल जाओ कड़ी धुप में मगर,
अपनों से कभी साया- ए- दीवार न मांगों…
अब तो लोग अपने धब्बों पे गरूर करने लगे हैं.
लेकिन, फिर भी उनसे अपनों वाली खुशबू आती है.
वो ऐसा वार करते हैं कि पैरों तले जमीन खिसक जाती है.
बस इसी उधेड़- बुन में दिन, महीने, साल गुजरते जा रहे हैं.
मेरी उंगलियां ही मुझे सिखाती है दुनियाँ में बराबर कोई नहीं है..