मस्त विचार 2133

मेरी पीठ में चुभ चुके तीरों से उतनी तकलीफ नहीं हुई ज़नाब,

दर्द का अहसास तो तब हुआ जब तीरों की कमान अपनों के हाथो में देखी !

मस्त विचार 2132

यही सोचकर हर मुश्किलों से लड़ता आया हूँ,

कि धूप कितनी भी तेज हो समुन्द्र कभी सुखा नहीं करते !

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