मस्त विचार 2396
कहाँ पहले सी अब वो यारियाँ है,
सभी के सर पे ज़िम्मेदारियाँ हैं.
सभी के सर पे ज़िम्मेदारियाँ हैं.
मुस्कुराओ तो लोग जलते हैं, तन्हा रहो तो सवाल करते हैं.
गहरा वही हो सकता है जिसने गहरी चोटें खाई हो…
परहेज है जिससे मुझे, उसी तरफ खिंचाव है.
_ क्योंकि मनुष्य के वचन फल के समान होते हैं, उन्हें परिपक्व होने के लिए पर्याप्त समय चाहिए.