मस्त विचार 2172

‘इंसान’ की ‘फ़ितरत’ भी ‘अज़ीब’ है –

‘स्वयं’ की गलती पर तो ‘वकील’ बनता है..और

‘दूसरों’ की ‘गलती’ पर सीधे ‘जज’ बन जाता है.

मस्त विचार 2171

कोई रूठे कोई माने, मैं ना पीछे जाऊँगा.

मैं तो मस्त मगन हुआ, तेरी शरण में ही सुख पाऊँगा.

एक तो मस्ती इस दुनिया की, पल- पल है भटकावे.

दूजी मस्ती प्रेम तेरे की, हर पल बढ़ती जावे.

बहुत निहारा इस दुनिया को, दर्द ना किसी का बाँटा.

तेरी एक नजर से मिट गयी, मेरे दुख की रेखा.

तुझसे पाकर प्यार अनूठा फिर ना किसी को देखा.

तेरे संग मगन हुआ इस दुनिया को, जग को भुला.

मस्त विचार 2170

अच्छाई और बुराई दोनों हमारे अंदर है, _

_ जिसका अधिक प्रयोग करोगे, वो उभरती व निखरती जाएगी ..

मस्त विचार 2168

सजा बन जाती है गुजरे वक़्त की यादें,

_ ना जाने क्यों लोग, मतलब के लिए मेहरबान होते हैं.

हम जैसे हैं वैसा स्वीकारने वाले इस दुनिया में कम होते हैं,

_ ग़र कोई हमारी ज़िंदगी में ऐसा है तो यकीं करिए, हम पर ख़ुदा की मेहर है.!!

मस्त विचार 2167

यूं तो सब के साथ हंस लेता था मैं.

आज क्यूं बेवजह रोने लगा हूँ मैं.

बरसों से हथेलियां खाली ही रहीं मेरी.

फिर आज क्यों लगा सब खोने लगा हूँ मैं.

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