मस्त विचार 2172
‘स्वयं’ की गलती पर तो ‘वकील’ बनता है..और
‘दूसरों’ की ‘गलती’ पर सीधे ‘जज’ बन जाता है.
‘स्वयं’ की गलती पर तो ‘वकील’ बनता है..और
‘दूसरों’ की ‘गलती’ पर सीधे ‘जज’ बन जाता है.
मैं तो मस्त मगन हुआ, तेरी शरण में ही सुख पाऊँगा.
एक तो मस्ती इस दुनिया की, पल- पल है भटकावे.
दूजी मस्ती प्रेम तेरे की, हर पल बढ़ती जावे.
बहुत निहारा इस दुनिया को, दर्द ना किसी का बाँटा.
तेरी एक नजर से मिट गयी, मेरे दुख की रेखा.
तुझसे पाकर प्यार अनूठा फिर ना किसी को देखा.
तेरे संग मगन हुआ इस दुनिया को, जग को भुला.
_ जिसका अधिक प्रयोग करोगे, वो उभरती व निखरती जाएगी ..
जो हमारे पैर के आगे ठोकर बन के आता है.
_ ना जाने क्यों लोग, मतलब के लिए मेहरबान होते हैं.
_ ग़र कोई हमारी ज़िंदगी में ऐसा है तो यकीं करिए, हम पर ख़ुदा की मेहर है.!!
आज क्यूं बेवजह रोने लगा हूँ मैं.
बरसों से हथेलियां खाली ही रहीं मेरी.
फिर आज क्यों लगा सब खोने लगा हूँ मैं.