मस्त विचार 2123

वो रोज़ बात करता है मगर कुछ बोलता नहीं है

चौखट पर बैठा है मगर द्वार खोलता नहीं है,

नाराज़ है किसी से या है इंतज़ार में किसी के,

क्यों खामोशियों को अपनी वो तोड़ता नहीं है,

कौन से वादे ने उसका किया है ऐसा हाल,

बुराई तो करता है उसकी मगर कोसता नहीं है.

मस्त विचार 2121

*तुम आओ ना आओ,* *मै तुम्हे यूँही बुलाया करूँ…*

*तुम सुनो ना सुनो,* *मै तुम्हे यूँही पुकारा करूँ…*

*तुम मिलो ना मिलों,* मै तुम्हे यूँही पाना चाहूँ….*

*तुम कहो ना कहो,* *मै तुम्हे यूँही सुना करूँ……*

*तुम देखो ना देखो,* *मै तुम्हे बस निहारा करूँ…*

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