मस्त विचार 2312

मुहब्बत का हम हर इम्तिहान दे चुके

ग़ैरों से नहीं अपनो से धोखा खा चुके

समझा दिया वक़्त ने ख़ूब हमें ए यार

एक तुम्ही को अपना दिलबर चुन चुके।

मस्त विचार 2311

एक वक़्त था जब हम सोचते थे कि हमारा भी वक़्त आएगा…

और ये वक़्त है कि हम सोचते हैं कि वो भी क्या वक़्त था.

मस्त विचार 2309

मंजिल पर पहुंचकर लिखूंगा मैं रास्तों की मुश्किलों का जिक्र,

अभी तो बस आगे बढ़ने से ही फुरसत नही,

मस्त विचार 2308

मेरा ज़िंदगी पे ज़ोर है… या मैं ही इसके वश में हूँ..,

लोगों को क्या मैं दू सलाह.., मैं तो ख़ुद ही कशमकश में हूँ..!!!

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