मस्त विचार 2372
क्यों बोझ हो जाते हैं वो झुके हुए कंधे साहब,
जिन पर चढ़ कर कभी तुम दुनिया देखा करते थे…
जिन पर चढ़ कर कभी तुम दुनिया देखा करते थे…
मेरे अपने ही हर दिन मुझको थोड़ा- थोड़ा काटते रहे…
कुछ पराये अपने हुए, कुछ अपनों का रंग बदलता रहा…
एक वो जिनकी उम्र अधिक है,
दूसरे वो जिसने कम उम्र में ही बहुत सी ठोकरें खायी हैं…
लिखा तो है सफ़र मगर मंज़िल का निशान नहीं.
कल जो रंग थे, आज दाग हो गये.