मस्त विचार 2148
मंजिलें तो खुशनसीबों को नसीब हो गई, हम तो दीवाने हैं सफर में ही रहेंगे.
खुशनसीब होते हैं वे लोग.. जो जागी आंखों से अपने ख्वाब पूरे करते हैं.!!
कहां तक साथ चलोगे ये बताओ मुझको.
लेकिन उस के पहले हमें आसमान छू कर देखना है,
…..जिंदगी भी यही चाहती है.
लोगों को भी पता चले आखिर जिन्दगी होती क्या है…
जाने फिर क्यों लोग मुझे मगरूर समझते हैं.