मस्त विचार 2274
जब इंसान अव्यक्तिगत और नि: स्वार्थ सेवा करता है,
तब उसे कुछ भी खोने का डर नहीं रहता.
तब उसे कुछ भी खोने का डर नहीं रहता.
मगर भरोसा बार- बार नहीं.
ये दुनिया खामखां कहती है की तुम मेरे करीब नहीं………!!!!
जो मैं नहीं, तो तुम नहीं.
क़द में छोटे हों………… मगर लोग बड़े रहते हैं …..
मैंने फल देख के…….. इन्सानों को पहचाना है…..
जो बहुत मीठे हों ……….अंदर से ……सड़े रहते हैं…
एक उड़ जाए तो दूसरा भी उड़ ही जाता है..!!!!