मस्त विचार 2011
अपने से दूर जाने के लिए …!!
मस्त विचार 2010
काम पड़ा तो मलमल,
नहीँ तो टाट का पैबन्द हो गये ।
खिलखिला कर हँसना, भूल गये,
हल्के से मुस्कराकर, रस्म अदा हो गये ।
पहले लड़ भी जाते थे किसी से भी, किसी के लिये,
अब क्या बीच मे पड़ना, चुप ही रहना, बस,
अपने अपनों के दायरे, कितने सीमित हो गये ।
पीढ़ी दर पीढ़ी फ़ासले दरम्यां ऐसे बढ़े,
खून के रिश्ते पानी हो गये,
बुढ़ापे के नाम, दिन जवानी हो गये ।
अपनों से अपनों की सुन सुन कर,
अपने अपनों से दूर हो गये ,
कुछ बताये गये, कुछ भुलाये गये,
जो रंजिशों की बात हुई तो सुनते गये,
रिश्ते बचाने की बात पर, कान बहरे हो गये,
देखो कितने फासले हो गये,
सिर रख कर रो सके, जी हल्का कर सके,
जाने वो काँधे कहाँ चले गये ?
क्या बाँटेगा गम कोई किसी का,
बातों के सिलसिले ही अब खतम हो गये।
बदमज़ा हो जायेगी ये ज़िन्दगी,
इन फासलों से ,
अपनों से जो दूर गये तो खुद से दूर हो जायेंगे,
क्या पता कल अपने अपनों के दरम्यान, रहें ना रहें ,
कुछ ऐसा करो अपने आ जाये अपनों के पास,
बनी रहे विरासत के रिश्तों की मिठास,
कल अपने अपनों से कह सके,
दूरियों के दिन अब दूर गये, रिश्तों से रिश्ते जुड़ गये।
।। पीके ।।
मस्त विचार 2009
जिसको दिल का हाल बताने के लिए लफ़्ज़ों की जरुरत न पड़े.
मस्त विचार 2008
अब ये है कि …. ज़िन्दगी आ रहा हूँ मैं.
मस्त विचार 2007
जो उनसे नफरत करते हैं, उनका काम गंदगी और कचरा पैदा करना है.




