मस्त विचार 2152
ना कोई हल्का है ….ना कोई भारी..
सब संतुलन का खेल है..
सब संतुलन का खेल है..
तुझमें क्या क्या देखा है ये वक़्त मिला तो सोचेंगे.
लेकिन बहुत विस्तृत हूँ अपने अर्थों में.
वो लोग दूसरों के लिए हमेशा हाजिर रहते हैं .. !!
कहां तक साथ चलोगे ये बताओ मुझको.