मस्त विचार 1898
ग़लतफहमी में जीने का मज़ा कुछ और ही है…..
वरना हकीकतें तो अक्सर रुला देती है.
वरना हकीकतें तो अक्सर रुला देती है.
और अनुभव हमारे जीवन की सीख है.
मुस्कुराहट का क्या है, गैरों से भी वफा कर लेती है.
बहुत संभल के चले फिर भी फिसल गए हम,
किसी ने विश्वास तोड़ा तो किसी ने दिल,
और लोगों को लगा की बदल गए हम.
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए.
जिसे जी लिया उसे ज़िंदगी कहिए..