मस्त विचार 1896

आँसू जानते हैं कौन अपना है, तभी अपनों के आगे निकलते हैं,

मुस्कुराहट का क्या है, गैरों से भी वफा कर लेती है.

मस्त विचार 1895

किस्मत ने जैसा चाहा वैसे ढल गए हम,

बहुत संभल के चले फिर भी फिसल गए हम,

किसी ने विश्वास तोड़ा तो किसी ने दिल,

और लोगों को लगा की बदल गए हम.

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