मस्त विचार 2133
मेरी पीठ में चुभ चुके तीरों से उतनी तकलीफ नहीं हुई ज़नाब,
दर्द का अहसास तो तब हुआ जब तीरों की कमान अपनों के हाथो में देखी !
दर्द का अहसास तो तब हुआ जब तीरों की कमान अपनों के हाथो में देखी !
कि धूप कितनी भी तेज हो समुन्द्र कभी सुखा नहीं करते !
जो हर किसी के बस की बात नहीं.
तब अपने आप ही आप को खुशियां मिल जाएंगी.
आज भी उन का ही कहलाता हूं मैं.
हल्की सी ठंडक और सिमरन की प्यास..
संगत की सेवा और नाम की मिठास…….
शुरू कीजिये अपना दिन उस के नाम के साथ….