मस्त विचार 2133

मेरी पीठ में चुभ चुके तीरों से उतनी तकलीफ नहीं हुई ज़नाब,

दर्द का अहसास तो तब हुआ जब तीरों की कमान अपनों के हाथो में देखी !

मस्त विचार 2132

यही सोचकर हर मुश्किलों से लड़ता आया हूँ,

कि धूप कितनी भी तेज हो समुन्द्र कभी सुखा नहीं करते !

मस्त विचार 2128

सुबह का मौसम और तेरी याद..

हल्की सी ठंडक और सिमरन की प्यास..

संगत की सेवा और नाम की मिठास…….

शुरू कीजिये अपना दिन उस के नाम के साथ….

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