मस्त विचार 2127
“वक़्त” और “मुस्कान” ज़िन्दगी में खास हैं
कभी “वक़्त” हमें सब भुला “मुस्कराने” की ताक़त देता
तो किसी की एक “मुस्कान” “वक़्त” को ही भुला देती. . .
कभी “वक़्त” हमें सब भुला “मुस्कराने” की ताक़त देता
तो किसी की एक “मुस्कान” “वक़्त” को ही भुला देती. . .
जो मतलब पूरा होने पर अपनी राह बदल जाते हैं.
एक जगह अपनी औकात भी है….!!
शामें कटती नही और साल गुजरते जा रहे हैं.
चौखट पर बैठा है मगर द्वार खोलता नहीं है,
नाराज़ है किसी से या है इंतज़ार में किसी के,
क्यों खामोशियों को अपनी वो तोड़ता नहीं है,
कौन से वादे ने उसका किया है ऐसा हाल,
बुराई तो करता है उसकी मगर कोसता नहीं है.
मिट्टी का बना हूँ गुरूर जचता नहीं मुझ पर…