मस्त विचार 2127

“वक़्त” और “मुस्कान” ज़िन्दगी में खास हैं

कभी “वक़्त” हमें सब भुला “मुस्कराने” की ताक़त देता

तो किसी की एक “मुस्कान” “वक़्त” को ही भुला देती. . .

मस्त विचार 2126

जीवन की इस कठिन डगर में दोस्त हज़ारों मिल जाते हैं,

जो मतलब पूरा होने पर अपनी राह बदल जाते हैं.

मस्त विचार 2123

वो रोज़ बात करता है मगर कुछ बोलता नहीं है

चौखट पर बैठा है मगर द्वार खोलता नहीं है,

नाराज़ है किसी से या है इंतज़ार में किसी के,

क्यों खामोशियों को अपनी वो तोड़ता नहीं है,

कौन से वादे ने उसका किया है ऐसा हाल,

बुराई तो करता है उसकी मगर कोसता नहीं है.

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