मस्त विचार 1977
पतझड़ दिया था वक़्त ने सौगात में मुझे….
मैंने वक़्त की जेब से सावन चुरा लिया…
मैंने वक़्त की जेब से सावन चुरा लिया…
में ख्वाहिशों का बहोत कत्ल-ए- आम करता हूँ..!!
हम तो तेरे यार हैं,
न हार की फिकर करते हैं और न जीत का जिक्र करते हैं.
मंजिल भी मिलेगी और जीने का मजा भी आएगा.
जिनके पास खोने को कुछ नहीं बचता.
जिस भीड़ में तुम खड़े हो…उसमें कौन तुम्हारा है.