मस्त विचार 2020
काट सका है कौन, समय की धार कटारी से ।।
सबके अपनें दिन आते हैं बारी बारी से….. ।।
सबके अपनें दिन आते हैं बारी बारी से….. ।।
नदी ने हस कर कहा- जब तक तुझमे मिठास न आ जाये..
सत्य के दुर्दिनों की मत पूछो, झूठ की आरती उतारी थी.
कुल मिलाकर है बात इतनी सी, सबको अपनी ख़ुशी ही प्यारी थी.
हमने सब कुछ ख़ुदा पे छोड़ा था, फिर तो उसकी जबाबदारी थी.
राज गद्दी थी किसकी क़िस्मत में, किसकी क़िस्मत में जाँ निसारी थी.
हाय हमको भी क्या भरोसा था, मानते हैं ये भूल भारी थी.
क्योंकि, बहुत सारे लोग आपसे प्यार करते हैं…
देख के तुमको ये जिंदगी मुस्कुराने लगी.
ये इश्क़ की इन्तेहां है या दीवानगी मेरी
हर सूरत में सूरत तेरी नजर आने लगी.