मस्त विचार 1759
“कमाल” करते हैं हमसे जलन रखने वाले,
“महफिलें” खुद की सजाते हैं और चर्चे हमारे करते हैं.
“महफिलें” खुद की सजाते हैं और चर्चे हमारे करते हैं.
जब सब मुहं फेर लेते हैं तो खुदा साथ देता है.
मुट्ठी भी खाली रहेगी जब पहुँचोगे घाट पर.
मुस्कुराया कीजिए बड़ा अच्छा लगता है.
और तैयार सदा असफलता के लिए रहो,
तो आप जीवन में कभी निराश नही होओगे.
कुछ इस तरह दर्द भरे हो गए हैं हम..