मस्त विचार 1811
ज़िन्दगी रोज़ कोई ना कोई ताज़ा सफ़र मांगती है,
और थकान शाम को अपना घर मांगती है.
और थकान शाम को अपना घर मांगती है.
तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है, समझता हूँ.
तुम्हें मैं भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नहीं लेकिन,
तुम्हीं को भूलना सबसे जरूरी है, समझता हूँ.
बस उम्मीद थी….