मस्त विचार 1794

कोशिश कर रहा हूँ की कोई मुझसे न रूठे !

जिन्दगी में अपनों का साथ न छूटे !

रिश्ते कोई भी हो उसे ऐसे निभाउ !

कि उस रिश्ते की डोर ज़िन्दगी भर न छूटे.

मस्त विचार 1790

मैं लिखता हूँ हर रंग के लिए

अपने अंग-अंग के लिए

मैं अपना वर्तमान, भविष्य और इतिहास लिखता हूँ

सुख, दुःख, के साथ प्रेम का अहसास लिखता हूँ

बात जो अनकही है

उसको शब्दों का देकर आकार लिखता हूँ

जो दिलो में घुट गयी सबके, उसे बेज़ार लिखता हूँ

जो नियते छुपाई गई सफ़ेद-पोशी में

उनके कपडे उतार लिखता हूँ

आ गयी जिन अनुभवो से बालो में सफेदी

उन अनुभवो की कालिख उतार लिखता हूँ

कुछ तो लोग कहेंगे, कहने दो

खुदगर्ज हूँ मैं सर झुका नहीं सकता

जीवन जीकर उनको परेशान हर बार करता हूँ.

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