मस्त विचार 1789
तेरी रजा को समझ पाऊँ,
ये हुनर मुझमें नहीं है मेरे यार,
जिंदगी को आजमाने के बाद बस इतना जाना है,
कि तूने जो कुछ भी किया मेरे भले के लिए किया है.
ये हुनर मुझमें नहीं है मेरे यार,
जिंदगी को आजमाने के बाद बस इतना जाना है,
कि तूने जो कुछ भी किया मेरे भले के लिए किया है.
उन्हें एक दिन हाथ भी पसारने पड़ते हैं.
हम जरा से क्या बदले…सबको हैरत हो गई.
जिन्हें हमारी फ़िक्र होती है.
जितना भी सोचते हैं, उतना ही महक जाते हैं….