मस्त विचार 1693
रास्ते कहां खत्म होते हैं, जिंदगी के सफर में.
मंजिल तो बस वहीँ हैं, जहाँ ख्वाहिशें थम जाएं.
मंजिल तो बस वहीँ हैं, जहाँ ख्वाहिशें थम जाएं.
लेकिन उसके ख्वाब बड़े होने चाहिए.
उसके साथ खड़े रहने से अच्छा हैं, अकेले खड़ा रहना.
गरूर में रहोगे तो रास्ते भी न देख पाओगे.
और अच्छे लोगों की भीड़ नहीं होती.
जलवे दिखाते हैं…दोस्त तो क्या, दुश्मन भी याद रखते हैं.