मस्त विचार 1488
कभी ख़ुशी की आशा, कभी गम की निराशा,
कभी खुशियों की धूप, कभी हकीकत की छाया,
कुछ खोकर……..पाने की आशा……
शायद यही है, ज़िन्दगी की सही परिभाषा…
कभी खुशियों की धूप, कभी हकीकत की छाया,
कुछ खोकर……..पाने की आशा……
शायद यही है, ज़िन्दगी की सही परिभाषा…
किसी शख्स को भुला देना इतना आसान तो नहीं होता, दिल को समझने में कुछ वक़्त तो लगता है….
भरी महफ़िल में जब कोई अचानक याद आ जाये तो फिर आँसुओ को छुपाने में कुछ वक़्त तो लगता है….
जो शख्स जान से भी प्यारा हो अचानक दूर हो जाये तो….दिल को यकीं दिलाने में कुछ वक़्त तो लगता है…..
खुद उसकी ख़ुशबू लेना मत भूलिये.
इसलिए इस अंतराल में खुश रहिए और दूसरों को खुश करिए.
जीवन के हर एक छण का आनंद लीजिए.
सब धरा रह जाएगा !