मस्त विचार 1476
कैसे नादान हैं हम, दुःख आता है तो अटक जाते हैं ,
और सुख आता है तो भटक जाते हैं.
और सुख आता है तो भटक जाते हैं.
उतना ही छोटा हमारी वास्तविक सफलता का दायरा होगा.
पर जब तक खुद से न मिलो, अकेले हो.
बहुत से लोगों के लिए ये अभी भी सपना हैं !
अकेला मुझे छोड़ इस बेदर्द दुनिया में, तड़पता छोड़ कर तुमको मिला क्या.
जो किसी को खुले तौर पर सलाह देता है वह उसे अपमानित और कलंकित करता है.