मस्त विचार 1623
बन सहारा बे सहारों के लिए, बन किनारा बे किनारों के लिए,
जो जिये अपने लिए तो क्या जिये, जी सको तो जियो हजारों के लिए.
जो जिये अपने लिए तो क्या जिये, जी सको तो जियो हजारों के लिए.
अपने पे भरोसा है तो एक दाँव लगा ले,
डरता है जमाने की निगाहों से भला क्यों ?
इन्साफ तेरे साथ है इल्ज़ाम उठा ले,
क्या ख़ाक वो जीना है जो अपने ही लिए हो,
खुद मिट के किसी और को मिटने से बचा ले,
टूटे हुए पतवार है कश्ती के तो हम क्या,
हारी हुई बाहों को ही पतवार बना दे.
जिसमें जीने की चाहत होनी चाहिए.
एक तो अभी और एक हमेशा के लिए..।..
लेकिन दूसरों पर निर्भर नहीं करती.
अब ये शिकायतें है कि किनारा नहीं मिला.