मस्त विचार 1645

वही इंसान दूसरों की गलतियों को क्षमा कर सकता है,

जो खुद को संभालना तथा अपनी बिगड़ी को बनाना जानता है.

मस्त विचार 1644

 

भाव शून्य सा, निरंतर बिन जल

आँसुओ से खुद को सींचता हूँ मैं

तुम खड़े हो साथ, बस इस आस में जी रहा हूँ मैं

दबे पाँव बे गैरत, जिंदगी झुका रही

आहिस्ता आहिस्ता, मोहवश जी रहा

राह उसकी तक रहा मैं..

मस्त विचार 1642

सुमिरन करो जी सुमिरन…

ना घटने का डर, ना लुटने का डर, ना जरूरत वारीस की, ना तालों की.

नींद आती है सकुन की हर रोज ..यही है सच्ची दौलत बिन दौलत वालों की.

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