मस्त विचार 1633
हर एक ने देखा मुझे अपनी नजरों से,
काश कोई तो मेरी नजर से भी देखता मुझको.
काश कोई तो मेरी नजर से भी देखता मुझको.
“कौन” हाथ छुड़ा कर भागता है..और “कौन” हाथ पकड़ कर…
बार बार मरकर देखा तो, जीना सीख गए.
ठोकर खाते रहे, चलते रहे फिर भी हम.
इसी तरह इक दिन हम संभलना सीख गए.
ज़िन्दगी छोटी लगी, और सपने बड़े बड़े.
तन से हारे नहीं, मन से लड़ना सीख गए.
दुख सुख गम ख़ुशी, सबसे एकाकार हुए.
गम को छुपाना और दर्द में मुस्कुराना सीख गए.
सच तो ये है कि वहाँ भी तुम थे…..
नए मौसम का पता बता, जो गुजर गया, वो गुजर गया.
समझ लो सही होना शुरू हो गया.