मस्त विचार 1531
पहुँच गए हैं, कई राज मेरे गैरों के पास…
कर जो लिया था मशवरा, इक रोज़ अपनों के साथ.
कर जो लिया था मशवरा, इक रोज़ अपनों के साथ.
और पैसे की जुबान बोलो तो आ कर घेर लेते हैं.
एक बार उसके हालात समझने की कोशिश जरूर करें.
_ इससे आप अपने कार्यों में अवश्य विजय हासिल करोगे ..
गमों का दौर भी आए तो…, मुश्कुरा कर जियो..!”