मस्त विचार 1503
ये कैसा जादू समझ में न आया.
तूने ही मुझको जीना सीखाया.
ऎसा ज्ञान तूने दिया है.
बदल दिया जीवन मेरा सारा.
कैसे उतारूँ ये कर्जा तुम्हारा.
तूने ही मुझको जीना सीखाया.
ऎसा ज्ञान तूने दिया है.
बदल दिया जीवन मेरा सारा.
कैसे उतारूँ ये कर्जा तुम्हारा.
तूने ऐसी पिलाई निखर गया हूँ.
दुःख और गम सब भूल गया हूँ.
तेरे हाथों में पड़ कर खिल गया हूँ.
लेकिन कभी नहीं भूलते वो जो आप के कहने से वो महसूस करते हैं.
जाती हुई जवानी, आता बुढ़ापा देखा,
बदलती रुतों – रुखों का ढलता साया देखा,
जो बदले वो दुनिया, न बदला कभी वो खुदा देखा.
परखो तो कोई अपना नही, समझो तो कोई पराया नहीं…
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