मस्त विचार 1334
क्योंकि…. मुझे अपने सिवा किसी से कोई उम्मीद नहीं …!!!
क्योंकि…. मुझे अपने सिवा किसी से कोई उम्मीद नहीं …!!!
अक्सर वही आपकी आँखें खोल जाता है.
हर ईंट सोचती है, दीवार मुझ पर टिकी है.
उम्र इतनी तो न थी जितने सबक सीख लिए हमने.
दबा के मन की बात, मौन तुम धरते क्यों हो ?
शरीर में मुहं में जिह्वा, खुल कर अपनी बात कहो.
मरने पर चुप रहना, जिन्दा मरते क्यों हो ?
अरे, भले तुम से तो “मूर्ख” ही लगते हैं.
भले निरर्थक सही, मगर कुछ कहते हैं.
तुम सुशिछित होकर, भला हिचकते क्यों हो ?
चलो होंठ खोलो, अब यह संकोच हटाओ.
बोल उठो, मृदु बोलो, सफल तुम भी कहलाओ.
उठो, भरो हुंकार, समर से हटते क्यों हो ?
किसी से डरते क्यों हो ?
पर वह नहीं करता जो हो सकता है “खुद को बदलना”..