मस्त विचार 1450
न जाने कब खर्च हो गए पता ही न चला,
वो लम्हे जो छुपा के रखे थे जीने के लिए…
वो लम्हे जो छुपा के रखे थे जीने के लिए…
उसे ऐसे जीयो जैसे कि,
ज़िन्दगी तुम्हे नहीं मिली, ज़िन्दगी को तुम मिले हो.
समझा-बुझा के उठा देती हैं जिम्मेदारियां.
फिर वो भी सुनाई देने लगता हैं जो,कभी कहा ही नहीं..
उजालों में चिरागों के मायने नहीं होते.
चुटकियाँ बजा के वो बोले…ऐसे, ऐसे, ऐसे…