मस्त विचार 1448
नींद तो अब भी बहुत आती है मगर,
समझा-बुझा के उठा देती हैं जिम्मेदारियां.
समझा-बुझा के उठा देती हैं जिम्मेदारियां.
फिर वो भी सुनाई देने लगता हैं जो,कभी कहा ही नहीं..
उजालों में चिरागों के मायने नहीं होते.
चुटकियाँ बजा के वो बोले…ऐसे, ऐसे, ऐसे…
और मेरे बुरे वक्त ने मुझे बताया है कि दुनिया कैसी है.
मेरी तलाश का भी तो, ज़रिया बदल गया..
ना शक्ल ही बदली, न ही बदला मेरा किरदार.
बस लोगों के देखने का नज़रिया बदल गया..
हम जिस दीये के दम पे बगावत पे उतर आये.,
सोहबत मे अँधेरे के, वो दिया बदल गया..
ईमान, अदब, इल्म, हया, कुछ भी नहीँ कायम.,
मत पूछिये इस दौर मे क्या क्या बदल गया..