मस्त विचार 1453

ज़मीर ज़िंदा रख यानी कबीर ज़िंदा रख,

सुल्तान भी बन जाए तो दिल में फ़क़ीर ज़िंदा रख,

लालच डिगा न पाए तुझे आंखो का नीर ज़िंदा रख,

इन्सानियत सिखाती जो मन में वो पीर ज़िंदा रख,

हौसले के तरकश में कोशिश का तीर ज़िंदा रख !!

मस्त विचार – कही अनकही – 1451

कही अनकही ।।

कुछ कही, कुछ अनकही,

जो कही तो कहकहे हो गए,

किसी को कुछ कहा किसी को कुछ

यूँ ही बेवजह फासले हो गए

फासले जो दरमियाँ यूँ हो गये,

कुछ बात जुबां पे आई,

कुछ जुमले अंदर ही रह गये ।

कुछ बताया,कुछ छुपाया,

बताते छुपाते रिश्तों के धागे

सरे बाज़ार नीलाम हो गये ।

पत्ते क्या झड़े शाख से,

तोड़ने टहनियां,

लकड़हारे निकल गये ।

बासंती हवा सा अपनों का मिलना,

गर्म लू सा किसीका बिछड़ जाना ।

क्या कहना,क्या छुपाना ?

फासलों को छोड़ दिया तो,

हर कहकहे गीत हो गये ।

।। पीके ।।

मस्त विचार 1449

ज़िन्दगी चाहे एक दिन की हो, चाहे चार दिन की.

उसे ऐसे जीयो जैसे कि,

ज़िन्दगी तुम्हे नहीं मिली, ज़िन्दगी को तुम मिले हो.

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