मस्त विचार 1239

जो कभी हंस के मिलते थे, वो अब इल्जाम देते हैं.

वक़्त की बात है, लोग बदले गिन- गिन कर लेते हैं.

मस्त विचार 1237

मुझे जो कहना चाहता हूँ , वो मै कह नहीं पाता हूँ.

कहने के बाद लगता है, यह वह नहीं, जो मै कहना चाहता था.

मस्त विचार 1234

ज़िंदगी का बेहतरीन रिश्ता वही होता है,,

जो वर्षों बीत जाने के बाद भी, वहीं से

शुरू हो, जँहा ये कभी रुक सा गया,

कंही खो सा गया था.

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