मस्त विचार 1371
हाथ क्या मिलाया आप जैसे कुछ दोस्तों से,.
आप सब तो दुःख की सारी लकीरें मिटा गए.
आप सब तो दुःख की सारी लकीरें मिटा गए.
लोग कह भी लेते हैं और जी भी लेते हैं.
कि वह अपना बुरा कभी नहीं चाहता.
क्योंकि उम्मीद ही नहीं करता मैं ज्यादा खुशी की.
करी जब आस तो केवल मिला उपहास लोगों से.
जो अपने सामने सबको बहुत छोटा समझतें हैं,
नहीं करनी मुलाकातें मुझे उन ख़ास लोगों से.
जरुरी नहीं सबकी किस्मत में चुप कराने वाले हों.