मस्त विचार 1365
कल किसने देखा है, आज का दिन भी खोये क्यूँ.
जिन घड़ियों में हँस सकते हैं, उन घड़ियों में रोयें क्यूँ.
जिन घड़ियों में हँस सकते हैं, उन घड़ियों में रोयें क्यूँ.
मुझे भूल जाओ तो मानूं की तुम्हे मुझसे मोहब्बत है.
न मैं अपने बस में रहा न मनवा अपने बस में.
तब उन मे से कुछ आप की झोली में भी आ जाती हैं.
तब से एक दूजे के…वो मेहमान हो गये.
वो भी सहने वालों पर ही फिदा है…..