मस्त विचार 1155

क्या है उससे अपना नाता ?

मन के अँधेरे को तू है मिटाता, ज्ञान के प्रकाश को है बिछाता.

प्रेम की पुलक को है बढ़ाता, भटकों को सन्मार्ग दिखाता.

रोते मन को रोज हंसाता, मृत जीवन में साँस चलाता.

दुखियों के दुःख दर्द मिटाता, सदाचार का पाठ पढाता.

क्या है उससे अपना नाता ?

मस्त विचार 1154

चलो जिंदगी को जिंदादिली से जीने के लिये एक छोटा सा उसूल बनाते हैं,

रोज कुछ अच्छा याद रखते हैं और कुछ बुरा भूल जाते हैं .

मस्त विचार 1152

“राहत” भी अपनों से मिलती है,

“चाहत” भी अपनों से मिलती है,

“अपनों से कभी रुठना नहीं, क्योंकि

“मुस्कुराहट” भी सिर्फ अपनों से मिलती है”

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