मस्त विचार 1156
सब को इकट्ठा करने की ताकत प्रेम में है,
और सब को अलग करने की ताकत वहम में है.
और सब को अलग करने की ताकत वहम में है.
मन के अँधेरे को तू है मिटाता, ज्ञान के प्रकाश को है बिछाता.
प्रेम की पुलक को है बढ़ाता, भटकों को सन्मार्ग दिखाता.
रोते मन को रोज हंसाता, मृत जीवन में साँस चलाता.
दुखियों के दुःख दर्द मिटाता, सदाचार का पाठ पढाता.
क्या है उससे अपना नाता ?
रोज कुछ अच्छा याद रखते हैं और कुछ बुरा भूल जाते हैं .
वहाँ खुद को समझ लेना ही बेहतर है.
“चाहत” भी अपनों से मिलती है,
“अपनों से कभी रुठना नहीं, क्योंकि
“मुस्कुराहट” भी सिर्फ अपनों से मिलती है”
वह उस की कीमत नहीं समझता.