मस्त विचार 1126
जिन्दगी न पूछ हमसे क्यों फिर हम इतना बदल गए,
तेरी मेहरबानी से जिस सांचे में घुसे उसी में ढल गए.
तेरी मेहरबानी से जिस सांचे में घुसे उसी में ढल गए.
पर जिंदगी जैसी दिखती है- होती नहीं वैसी
इस हकीकत को शायद भूला दिया था- हमने.
सबसे पहले उसे एक नए और अलग नजरिए से भी सोचें.
अपने आप में खुश रहो
खुशियों का इंतज़ार किसलिए
दूसरों की मुस्कान में खुश रहो
क्यूँ तड़पते हो हर पल किसी के लिए
कभी तो अपने आप में खुश रहो
छोटी सी ज़िन्दगी है हर हाल में खुश रहो.
अक्सर खो जाते हैं…
मुझे शौक है उन्हें जमा करने का.
क्योंकि …अच्छी बातें तो बुरे लोग भी कर लेते हैं.