मस्त विचार 1167

सजा को मैंने रजा पे छोड़ दिया,

हर एक काम को मैंने खुदा पे छोड़ दिया,

वो मुझे याद रखे या भुला दे,

उसी का काम था उसी की रजा पे छोड़ दिया,

उसी की मर्जी बुझा दे या जला दे,

चिराग मैंने जला के हवा पे छोड़ दिया.

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