मस्त विचार 1306
अपने आप चलने का आनन्द ही कुछ और है.
अपने आप चलने का आनन्द ही कुछ और है.
..तो बुरे लगने लगते है.
क्योंकि हर ठोकर व्यक्ति को सबक दे कर जाती है.
हर कोई खुश रहे, यह चाहत है मेरी,
भले ही मुझे कोई याद करे या न करे,
लेकिन हर अपने को याद करना आदत है मेरी.
कब तक झूठे सहारे ढूंढते रहोगे ?
उसे समझने की कोशिश न कर.
सुन्दर सपनो के ताने बाने बुन,
उसमे उलझने की कोशिश न कर.
चलते वक़्त के साथ तू भी चल,
उसमे सिमटने की कोशिश न कर.
अपने हाथो को फैला, खुल कर साँस ले,
अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर.
मन में चल रहे युद्ध को विराम दे,
खामख्वाह खुद से लड़ने की कोशिश न कर.
कुछ बाते रब पर छोड़ दे,
सब कुछ खुद सुलझाने की कोशिश न कर.
जो मिल गया उसी में खुश रह,
जो सकून छीन ले वो पाने की कोशिश न कर.
रास्ते की सुंदरता का लुत्फ़ उठा,
मंजिल पर जल्दी पहुचने की कोशिश न कर.