मस्त विचार 1242
उसने ज़मीन ही मेरे कदमो से खींच ली…
रास्ते की ठोकरों से भी जब मैं गिरा नही…
रास्ते की ठोकरों से भी जब मैं गिरा नही…
लेकिन नजदीकी इतनी न हो जाए कि रिश्तों में घुटन होने लगे.
मै कहाँ रहता हूँ…… ?
वक़्त की बात है, लोग बदले गिन- गिन कर लेते हैं.
असफलता स्वीकार न की जाए.
कहने के बाद लगता है, यह वह नहीं, जो मै कहना चाहता था.