मस्त विचार 1106

मकसद कुछ जिंदगी का ऊँचा बना के तो देख.

संकल्प दृढ हो मन में फिर कदम बढ़ा के तो देख.

तेरी जिंदगी भी रोशनी से पुरनूर होगी.

किसी की चौखट पे तू भी दीप जला के तो देख.

मस्त विचार 1104

मैं रूठा, तुम भी रूठ गए,

फिर मनाएगा कौन ?

आज दरार है, कल खाई होगी,

फिर भरेगा कौन ?

मैं चुप, तुम भी चुप,

इस चुप्पी को फिर तोड़ेगा कौन ?

बात छोटी को लगा लोगे दिल से,

तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन ?

दुखी मैं भी और तुम भी बिछड़ कर,

सोचो फिर हाथ बढ़ाएगा कौन ?

न मैं राजी, न तुम राजी,

फिर माफ करने का बड़प्पन दिखाएगा कौन ?

डूब जाएगा यादों में दिल कभी,

तो फिर धैर्य बंधाएगा कौन ?

एक अहम मेरे, एक तेरे भीतर भी,

इस अहम को फिर हराएगा कौन ?

जिंदगी किसको मिली है सदा के लिए ?

फिर इन लम्हों में अकेला रह जाएगा कौन ?

मूंद ली दोनों में से गर किसी दिन एक ने आँखें,

तो कल इस बात पर फिर पछताएगा कौन ?

मस्त विचार 1102

खुशनसीब हैं वो जो दिल में किसी को जगह देते हैं.

बैचेनी सहकर भी दूसरों को हँसना सीखा देते हैं.

दुनिया वाले लाख चाहे बदनाम उन्हें कर लें,

मगर वो सादगी से हर दिल में जगह बना लेते हैं.

error: Content is protected