मस्त विचार 1013
ज़माना बदलेगा इस बात का, किसको यकीं………
आओ, हम ऎसा करें, खुद को बदल कर देख लें….
आओ, हम ऎसा करें, खुद को बदल कर देख लें….
मैं ज़ख्म खाता हूँ तो और निखर जाता हूँ………
उतनी जल्दी सही ज़िन्दगी जीना भी सीख जाते हैं.
सागर का पानी खारा रहता है, क्योंकि वो लेता रहता है.
नाले का पानी दुर्गन्ध पैदा करता है, क्योंकि वो रुका रहता है.
अपना जीवन भी वैसा ही है,
देते रहेंगे तो मीठे लगेंगे, लेते रहेंगे तो खारे लगेंगे.
नहीं मिलते जहाँ चोट के निशान…..
ठोकरें ज़हर तो नहीं जो खा के मर जाएँ….
_दूर हो जाना किसी जीत से कम नहीं होता..