मस्त विचार 1066
“नमस्ते” प्रशंसा का एक हल्का- सा स्वरुप है,
अतः उत्तम प्रभाव डालने के लिए यह एक सहज उपाय है.
अतः उत्तम प्रभाव डालने के लिए यह एक सहज उपाय है.
ना तो किसी को ग़म चाहिए और ना ही किसी को कम चाहिए…”
ढूंढने चले थे जिंदगी, जिंदगी से दूर हो गए.
फूल तो काँटों में भी खिला करते हैं,
थक कर ना बैठ ऐ मंजिल के मुसाफिर,
हीरे अक्सर कोयले में ही मिला करते हैं.
मेरी काबिलियत निखरी है तेरी हर आजमाईश के बाद….